Thursday, 18 October 2018

कुछ ऐसे ही

आजकल मैं बदल सा गया हूं। पता नही क्यू । लगता हैं मुझे कुछ हुआ हैं ? मै जानता हूं , अब मैं तुम्हारे लिये कुछ नही हूं मतलब कुछ नही। पर मैं आज तक समझ नही पाया मैं क्या था तुम्हारे लिये ? एक दोस्त, उससे बड़कर कुछ या सिर्फ कुछ समय के लिये तुम्हे हसाने के लिये लाया गया खिलौना। तुम्ने जो किया , वो किया । पर तुम्हारे टाईम पास ने मुझे सच मे खिलौना ही बना दियां। मैं जानता हूं ,तुम मुझे एक मजाक की तरह भूल चुकी हो । पर मैं तुम्हे चाहकर भी नही भुल पा रहा । रोज सुबह तुझे भुल जाने का वादा करता हु खुदसे, ओर शाम आते आते तु याद आ ही जाती हैं। पता नही मुझे क्या हुआ हैं , यु तो मेरी याददाश्त कमजोर हैं ,बहुत जल्दी सब भुला देती हैं । पर तुम्हे मैं भुल नही पा रहा। पता नही क्युं? पता नही मुझे क्या हुआ हैं, प्यार तो नही हैं ये ओर नफरत मैं चाहकर भी तुमसे नही कर सकता।  बताओ ना यार क्या हैं ये , मैं तुम्हे याद नही करना चाह्ता। मुझे बहुत तकलिफ होती हैं , तुम्हारे झुटे से वादों को सोच कर। मैं टूट जाता हूं तुम्हारी यादों के आ जाने से। मैं तुम्हे याद नही करना चाह्ता पर तुम क्यू मुझे बार बार याद आती हो। जिस तरह तुम जा चुकी हो अपनी यादों को भी ले जाओ। हो सके तो मुझे इन यादों से भी अकेला कर जाओ। मैं अकेला जी सकता हूं..... हाँ मैं अकेला जी सकता हूं। पता नही क्या हुआ हैं मुझे???
©ayushpancholi

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