Thursday, 18 October 2018

कुछ ऐसे ही

" आज अचानक आयी इस बेमौसम बारिश ने फिर तुम्हारी याद दिलादी। तुम भी तो इस बारिश की तरह ही बेमौसम मेरी जिन्दगी मे आयी थी ना। ओर इस बात की गवाह तो दुनिया है , बेमौसम आयी बारिश से लोगो को खुशी मिले या नही वो किसी ना किसी को बहुत गहरा दर्द जरुर दे जाती हैं। ठीक तुम्हारी तरह , तुम भी तो इस बारिश की ही तरह आयी थी ना , और देखो मुझसे मुझको ही छीन कर ले गयी । अब ना मैं वो मैं रहा और ना वो हम(मैं और तुम) रहे। पर वही तुम मे तुम रही । बिल्कुल एक बेमौसम बारिश की तरह........
©ayush_tanharaahi

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