Thursday, 18 October 2018

कुछ ऐसे ही

कुछ ऐसा हैं जिसे मैं भुला देना चाह्ता हूं। हैं कुछ लम्हे ऐसे, हैं कुछ तारिके। कुछ ऐसी बातें जो सुनने मे तो बहुत अच्छी थी, पर उनकी हकिकत उतनी ही भयावह । मैं भुला देना चाह्ता हूं , कुछ यादें । कुछ ऐसा जो होकर भी कभी ना हुआ। कुछ ऐसा जो था तो पर सब से अंजान था। भुला देना चहता हूं मैं वो सबकुछ जिसमे हम थे ,तुम और मैं। मैं नही । कुछ ऐसा जो हुआ पर होकर भी कभी ना हुआ। हाँ वो सबकुछ जो झुठा था, बिल्कुल तुम्हारे वादों की तरह, बिल्कुल तुम्हारी तरह। अब झूठ मैं जीना अच्छा नही लगता, सच्चाई से बहुत अच्छी दोस्ती हो गयी हैं। पर एक सच ये भी हैं , मैं तुम्हे नही भुला सकता।  कुछ रिश्ता ही ऐसा बना दिया तुमने। ।☺
©ayushpancholi

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