अन्धेरो मे भी वो रोशनी की छटा बिखेर जाता हैं, बेजान पड़े जिस्मों मे भी वो जान फूँक जाता हैं। क्या डराएंगे ये हालातो के बोझिल साये उसे जनाब, वो कलमकार हैं,वो हर जगह अपनी कलम का कलाम छोड़ जाता हैं।
आयुष पंचोली
जरा जरा सी बात पर जिनकी आँखे भीग जाती हैं, वो लोग जीवन मे कभी किसी का बुरा चाह नही सकते। पर एक सच यह भी हैं, वो जीवन मे कभी किसी को अपना बना...
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