Thursday, 18 October 2018

कुछ ऐसे ही

"प्यार" और "नफरत" दोनो अलग अलग एहसास हैं । पर जब एक से होकर दुसरे तक कोई पहुँचता हैं , तो सोचो वो उसे कितनी शिद्दत से निभायेगा। जो इन्सान प्यार मे धोखा खाता हैं ना उसके अन्दर नफरत स्वतः ही आ जाती हैं, ओर जो हर जगह नफरत भरी निगाहो से देखा जाता रहा हैं ना वो सिर्फ सच्चे प्यार की तलाश करता हैं। जब किसी का प्यार नफरत मे बदलता हैं ना तो यकिन मानिये वो उसी शिद्दत से आपसे नफरत करेगा जिस शिद्दत से उसने प्यार किया था। क्युकी जब प्यार नफरत का रूप लेता हैं ना तो कारण कुछ बडा ही होता हैं। लोग समझना चाहते नही ओर कुछ समझकर भी ना समझ बने रह्ते हैं।
©ayushpancholi

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